उत्तराखण्ड में हिंसा की वारदातों में बढ़ोत्तरी की आशंका से सरकार की चिंता बढ़ गई है। जिसको देखते हुए सरकार ने रासुका का इस्तेमाल करने का फैसला किया है। सरकार ने प्रदेश के सभी जिलाधिकारियों को तीन माह तक अपने स्तर से रासुका लगाने का अधिकार दिया है।
सभी जिलाधिकारियों को 1 अक्टूबर 2021 से 31 दिसंबर 2021 तक की अवधि के लिए इस अधिनियम की धारा 3 की उपधारा 2 द्वारा प्रदत शक्तियों का प्रयोग करने के लिए सशक्त किया गया।
क्या है आदेश
चूंकि पिछले दिनों उत्तराखण्ड के कतिपय जिलों में हिंसा की घटनायें हुई हैं और उनकी प्रतिक्रियास्वरूप राज्य के अन्य भागों में भी ऐसी घटनायें हुई है और राज्य के अन्य भागों में भी ऐसी घटनायें होने की आशंका है।
और, चूंकि समाज विरोधी तत्व राज्य की सुरक्षा, लोक व्यवस्था और समुदाय के लिये प्रदायों और सेवाओं को बनाये रखने के लिये प्रतिकूल क्रियाकलापों में भाग ले रहे हैं,
और, चूंकि उत्तराखण्ड में विद्यमान और सम्भावित उपर्युक्त परिस्थितियों को दृष्टि में रखते हुए राज्य सरकार का यह समाधान हो गया है कि ऐसा करना आवश्यक है।
अतएव, अब राज्यपाल, साधारण खण्ड अधिनियम, 1897 (केन्द्रीय अधिनियम संख्या 10 सन् 1897) की धारा 21 के साथ पठित राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम, 1980 (केन्द्रीय अधिनियम संख्या 65 सन् 1980) की धारा 3 की उपधारा (3) द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करके तथा उत्तराखण्ड सरकार की सरकारी अधिसूचना संख्या 799/XX-5/21/04/रा०सु०का / 2003. दिनांक 04 जून, 2021 का आंशिक उपान्तरण करके उत्तराखण्ड राज्य के समस्त जिला मजिस्ट्रेटों को दिनांक:- 01 अक्टूबर, 2021 से तीन माह अर्थात 31 दिसम्बर, 2021 की अग्रेत्तर अवधि के लिये उक्त अधिनियम की धारा 3 की उपधारा (2) द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करने के लिये सशक्त करते हैं।

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